पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज योजना 2020 (PM FME)

पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज योजना (Pradhan Mantri Formalisation of Micro Food Enterprises (PM FME) Scheme)

खाद्य उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर ने आत्मभारत अभियान के अंतर्गत एक बड़ी घोषणा की है. केंद्र मंत्री ने पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज योजना की शुरुवात की है. योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देना है. ग्रामीण उद्यमियता के द्वारा देश के गाँव का विकास होगा. योजना को अगले 5 साल तक के लिए शुरू किया गया है. योजना का कैसे किसको मिलेगा, जानने के लिए अंत तक आर्टिकल को पढ़ें.

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पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज योजना –

  • सरकार ने योजना के अंतर्गत 35 हजार करोड़ का बजट तय किया है, जिसके अंतर्गत 9 लाख कुशल एवं अकुशल रोजगार उत्पन्न होगा, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा.
  • इस योजना के अंतर्गत लगभग 8 लाख इकाइयों को लाभ मिलेगा, जिसमे उनको ट्रेनिंग, सुचना, बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा.
  • योजना का उद्देश्य नए और छोटे उद्यमियों को मौका देना है, जिससे वे बाजार में उतर कर अपनी जगह बना सकें.
  • बेहतर प्रदर्शन के लिए सरकार उन्हें सस्ते में ऋण प्रदान करेगी, साथ ही नई – नई तकनीक बाजार में लाने की योजना सरकार बना रही है.
  • योजना को राज्य एवं केंद्र सरकार मिलकर शुरू कर रही है, जिसमें 60:40 का अनुपात होगा. पूर्व, हिमाचल एवं पहाड़ी क्षेत्र में यह अनुपात 90:10 का होगा. इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश में तो योजना का पूरा भार केंद्र सरकार उठाएगी.
  • योजना के अंतर्गत छोटे उद्यमियों को परियोजना की कूल लागत में 35 % सब्सिडी मिलेगी, साथ ही 10 लाख रूपए की अधिकतम राशी तय होगी.
  • लाभार्थी को अपनी परियोजना का कम से कम 10 % खर्च उठाना पड़ेगा, इसके अलावा का खर्च लोन के द्वारा उठाया जा सकता है.
  • इस योजना से लगभग 2 लाख छोटे स्तर के उद्यमियों को क्रेडिट लिंक सब्सिडी का लाभ मिलेगा.
  • स्थानीय फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट की इसमें मुख्य भूमिका है, क्यूंकि जितने भी खाद्य पदार्थ बनते है, वे ग्रामीण उद्यमियों द्वारा गाँव में बनते है फिर लोकल बाजार में उसे बेचा जाता है.
  • केंद्र सरकार चाहती है कि खाद्य पदार्थ कम से बर्बाद हो, किसानों की आय बढ़े, खाद्य इकाई में इन्वेस्टमेंट बढ़े जिससे रोजगार बढे.
  • जिन लोगों को रोजगार के चलते ग्रामीण क्षेत्र को छोड़ शहर में पलायन करना पड़ता है, उनके लिए यह विशेष लाभदायी है. सरकार चाहती है लोगों को रोजगार के लिए यहाँ वहां न भटकना पड़े. ग्रामीण निवासियों को उनके ही क्षेत्र में अच्छा रोजगार मिल जाए.

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) होगा लागु –

यह न्यू PMFME योजना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट दृष्टिकोण पर काम करेगी. राज्य सरकार इसके लिए ग्राउंड लेवल पर काम करेगी. सभी गाँव में विशेष अभियान के द्वारा जानकारी इकट्ठी की जाएगी. कच्चा मॉल कितना है, कितने समूह है उसके अनुसार हर जिले में उत्पाद का चयन होगा. यह उत्पाद अनाज या कोई खाद्य हो सकता है, जो जिले में ज्यदा पैदावार जिसकी होगी, वही चुना जायेगा. ये पदार्थ है जैसे आलू, लीची, टमाटर, पेठा, पापड़, आचार, मुर्गी पालन, मांस, बाजरा आदि शामिल है.

केंद्र सरकार एक जिला एक उत्पाद के तहत उन जिलों का चयन करेगी जो उसका उत्पादन अधिक करता है. हालाँकि अगर कोई और पदार्थ भी जिला में उत्पादित होता है तो उसका चयन भी हो सकता है.

PM FME योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया

योजना के तहत सरकार ने ऑनलाइन आवेदन प्रकिया चालू की है. जितने भी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां वे अगर आवेदन करना चाहती है तो आधिकारिक पोर्टल में जाएँ. फॉर्म भरने के बाद, आवेदक के खाते में अनुदान राशी सीधे ट्रान्सफर कर दी जाएगी.

योजना की आवश्कता क्यों है –

  • आधुनिक तकनीक और उपकरणों तक पहुंच का अभाव।
  • प्रशिक्षण की कमी।
  • संस्थागत ऋण तक पहुंच में कठिनाई।
  • उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण पर बुनियादी जागरूकता का अभाव।
  • ब्रांडिंग और विपणन कौशल का अभाव।

योजना से लाखों लाभान्वित होंगें, और कई नौकरियां निकलेगी. ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भर बनेगा, जिससे देश भी आत्मनिर्भर बनेगा.

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